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कल्पेश याग्निक का कॉलम: परीक्षाओं में बच्चे नहीं, समूचा राष्ट्र विफल हो रहा है

इस संदर्भ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना यह है कि शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत यह वर्ष एकदम अलग है। 2010 में आए उक्त कानून के 8 वर्ष पूरे हो गए। चूंकि 8वीं तक ही बच्चों को बिना रोके आगे की कक्षा में पहुंचाए जाने का प्रावधान है - इसलिए ये वर्ष वास्तव में एक पूरी उस पीढ़ी को नई व्यवस्था में ढालने जा रहा है - जो ‘विफलता’ के भय से मुक्त पूरी आठ कक्षाओं तक पढ़ चुके हैं। और अब पास-फेल के संघर्ष में शामिल होने जा रहे हैं।

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