देश में यूरिया के लिए होने वाले आंदोलन कैसे थम गए? इसकी किल्लत कैसे दूर हुई? https://ift.tt/2Jz2llg यूरिया से फसल और जमीन को होने वाले नुकसान को लेकर किसानों में जागरुकता आई है। 2012 से 2016 के बीच यूरिया की बिक्री 30 से 30.6 मिलियन टन के बीच रही। इस साल ये घटकर 28 टन हो गई है। हालांकि, ये मामूली आंकड़ा है। इसके अलावा मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड योजना लागू करने के चलते यूरिया की खपत में गिरावट आई है। इस योजना के तहत मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम (एनपीके) स्तर को 4:2:1 पर लाना है। प्रधानमंत्री ने 2022 तक यूरिया के इस्तेमाल को आधा करने को कहा है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
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