मैं गांव से पुरउम्मीद होकर लौटा कि चितलूर गांव की नई पीढ़ी एक सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही है जबकि कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां जिंदगी बंदूकों के साये तले सहमी और ठिठकी हुई है.from Latest News देश Firstpost Hindi https://ift.tt/2Lga4Wk
मैं गांव से पुरउम्मीद होकर लौटा कि चितलूर गांव की नई पीढ़ी एक सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही है जबकि कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां जिंदगी बंदूकों के साये तले सहमी और ठिठकी हुई है.
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