#MeToo: संपादक एमजे अकबर को उदार और बहुलवादी के रूप में जो सम्मान मिला था, उन्होंने उन मूल्यों को धोखा दिया
एमजे अकबर पर लगे आरोपों से उनकी प्रतिष्ठा और वो जो कुछ भी कहते थे, हमेशा के लिए खत्म हो गया है. एक लेखक और विचारक के रूप में उनकी विश्वसनीयता भी अगर खत्म नहीं तो कम जरूर हो गई हैfrom Latest News देश Firstpost Hindi https://ift.tt/2QOB0ui
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