25 नवंबर को अयोध्या में धर्म संसद का आयोजन जरूर था और इस आयोजन में उसी तरह के जुनून का प्रदर्शन, अधिक सज-धज, वैसे ही नारे, वही एक एजेंडा, और कमोबेश उसी तरह के तमाशे हुए जो 1990, 91 और 92 में हुए थे. लेकिन एक बड़ा अंतर भी था और वह था जनसमूह का रुझान.from Latest News देश Firstpost Hindi https://ift.tt/2PZaUZF
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