दो फर्जी शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा पास कराया
शिक्षा विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की पोल खुलने का सिलसिला जारी है। हाल ही में निलंबित डीईओ समर बहादुर सिंह और डीपीओ एसएसए रवि कुमार के कार्यकाल के दौरान हुए गड़बड़झाले से विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं।
फर्जी शिक्षकों का मामला
दैनिक भास्कर को मिले दस्तावेजों के अनुसार, पूर्व डीईओ विभा कुमारी ने वरूण कुमार यादव और सत्य नारायण यादव नामक दो शिक्षकों को फर्जी करार दिया था। इसके बावजूद, इन दोनों को सक्षमता परीक्षा में शामिल कर विभाग ने विशिष्ट शिक्षक का दर्जा दे दिया।
बहेड़ी प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय हावीडीह से जुड़े इस मामले में प्रधानाध्यापिका कंचन कुमारी ने स्पष्ट किया कि वरुण कुमार यादव और सत्य नारायण यादव ने कभी स्कूल में योगदान नहीं किया। इसके बावजूद, दोनों के नाम पर वेतन का भुगतान होता रहा।
विभागीय अनियमितताओं की जाँच
निलंबित डीईओ समर बहादुर सिंह ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट में निदेशक प्रशासन को बताया कि स्थापना शाखा के माध्यम से बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान और फर्जी शिक्षकों की बहाली जैसे मामले सामने आ सकते हैं।
प्रावि. हावीडीह के यू-डायस रिपोर्ट:
स्कूल में 7 शिक्षक दर्ज, लेकिन वास्तविकता में केवल 2 शिक्षक कार्यरत।
अन्य 5 शिक्षकों के फर्जी नियुक्ति और वेतन भुगतान की पुष्टि।
अन्य मामले:
प्रावि. गौआस बहेड़ी में प्रभात कुमार नामक शिक्षक को गलत तरीके से वेतन भुगतान।
मवि. हिरणी में सीता कुमारी नामक कथित शिक्षिका को लंबित वेतन के नाम पर ₹30 लाख भुगतान का प्रयास।
निगरानी और कार्रवाई की आवश्यकता
विभागीय जांच के मुताबिक, यदि इन मामलों की गहराई से जांच की जाए, तो 400-600 फर्जी शिक्षकों के नाम पर वेतन भुगतान का मामला उजागर हो सकता है।
डीपीओ स्थापना संदीप रंजन का बयान:
"मुझे रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो उसका उत्तर दिया जाएगा।"
शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षक बहाली और वेतन भुगतान के मामले ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है ताकि शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके।
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