क्या है पूरा मामला?
प्रधानाध्यापक राकेश कुमार ने आरोप लगाया है कि 4 मार्च 2024 को उनके विद्यालय में जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर संतोष कुमार पहुंचे और 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। रिश्वत देने से इनकार करने पर, उसी दिन दोपहर को DEO अजय कुमार सिंह, सांख्यिकी पर्यवेक्षक राजेंद्र कुमार सिंह, लेखा सहायक संतोष कुमार और वाहन चालक रमेश पासवान विद्यालय पहुंचे।
आरोप है कि उन्होंने विद्यालय में तोड़फोड़ की और प्रधानाध्यापक से अभद्र भाषा में बात की। इसके बाद लोहे की रॉड से प्रधानाध्यापक और उन्हें बचाने आए शिक्षक राकेश कुमार मिश्र की पिटाई की, जिससे दोनों घायल हो गए।
कोर्ट का हस्तक्षेप
प्रधानाध्यापक द्वारा 2 अप्रैल 2024 को अदालत में परिवाद दर्ज कराया गया। मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सुमित कुमार ने आरोपों को प्रथम दृष्टया सत्य पाया। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 324 (खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाना) और धारा 504 (शांति भंग के इरादे से अपमान) के तहत मामला दर्ज किया गया।
आगे की कार्रवाई
अदालत ने सभी आरोपियों को 11 फरवरी 2025 को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। इस मामले ने शिक्षा विभाग के कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिक्षा जगत की प्रतिक्रिया
बिहार के शिक्षक समाज ने इस घटना की निंदा की है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक-प्रशासन के बीच विश्वास को कमजोर करती हैं।
शिक्षक समाज बिहार इस मामले पर नजर बनाए हुए है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।
रिपोर्ट: शिक्षक समाज बिहार न्यूज़ डेस्क
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