मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा है कि तमिलनाडु जेल का नियम 481 असंवैधानिक है. यह नियम कैदियों के 50% वेतन कटौती का प्रावधान रखता है. कोर्ट का कहना है कैदियों को भोजन, कपड़े जैसी बुनियादी सुविधा देने के लिए उनके वेतन से कटौती करना गलत है. मदुरै के चिन्ना सोकिकुलम के केआर राजा ने मद्रास हाईकोर्ट की पीठ में कैदियों की वेतन कटौती के खिलाफ एक याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु की जेलों में कैदियों का 50 प्रतिशत वेतन उनके मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के लिए लिया जाता है. 20 प्रतिशत उन लोगों को दिया जाता है जो कैदी या पीड़ितों से प्रभावित हैं. अब अपने वेतन का केवल 30 प्रतिशत ही कैदी अपने बचत खाते में जमा कर पाते हैं. पीठ ने याचिका पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि नियमन के अनुसार, वेतन पुनरीक्षण आयोग का गठन वर्ष 2016 तक हो जाना चाहिए था, लेकिन यह अभी तक नहीं हुआ है. इसलिए कैदियों को मिलने वाले वर्तमान वेतनमान कानून के विरुद्ध थे. दिल्ली, बिहार, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों की जेलों की तुलना में तमिलनाडु कैदियों का वेतनमान बहुत कम था. तमिलनाडु जेल कानून 481 असंवैधानिक पीठ ने कहा है कि कैदियों के वेतनमान को संशोधित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के साथ ही उनके बचत में आने वाले 30 प्रतिशत शेयर को 75 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए आदेश जारी किया जाना चाहिए. तमिलनाडु सरकार का कहना है कि एक कैदी के भोजन में हर दिन लगभग 153 रुपए खर्च किए जाते थे, इसलिए उनके वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा यहां कट जाता है. न्यायमूर्ति केके ससीधरन और जीआर स्वामीनाथन की न्यायपालिका पीठ ने याचिकाकर्ता और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद आदेश दिया कि कैदियों के वेतन से की जाने वाली कटौती के पीछे ठोस वजह गिनाने होंगे. किसी से पूरा काम करवाना और बदले में आधा वेतन देना मानवाधिकार कानून का हनन करना है. इसके अलावा यह संविधान के खिलाफ है कि तमिलनाडु सरकार ने अभी तक वेतन संशोधन आयोग का गठन नहीं किया है. ऐसे में तमिलनाडु जेल कानून 481 जो 50 प्रतिशत वेतन कटौती की अनुमति देता है, असंवैधानिक है. पीठ ने तमिलनाडु सरकार को वेतन पुनरीक्षण आयोग बनाने और स्वीकार्य वेतनमान का तुरंत आश्वासन देने का आदेश दिया है.
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