बोहरा समुदाय की महिलाओं के एक समूह ने बुधवार को राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे समुदाय में प्रचलित महिलाओं के खतना की प्रथा को खत्म करने के लिए कदम उठाएं और इस मुद्दे को अपने चुनावी घोषणापत्रों में शामिल करें. ‘महिला खतना के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ पर महिलाओं ने यह आवाज उठाई है. हर साल यह दिन छह फरवरी को मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रथा/परंपरा को मानवाधिकार हनन की श्रेणी में रखा है. महिला खतना की शिकार हुई महिलाओं के निजी संगठन ‘वीस्पीकआउट’ की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘तमाम राजनीतिक दल महिला अधिकारों और कन्या शिशु की जीवन रक्षा की बात करते हैं. हम उनसे पूछना चाहते हैं कि महिला खतना पर उनका रूख क्या है? क्या वे इसे खत्म करेंगे? क्या वह इसपर प्रतिबंध का समर्थन करेंगे. यदि हां, वह हमारा वोट पाने के अधिकारी हैं.’ बयान में कहा गया है कि चूंकि इस साल लोकसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक दलों के घोषणापत्र का हिस्सा होना चाहिए. महिला खतना पीड़ित और वीस्पीकआउट की सदस्य मासूमा रानाल्वी का कहना है कि इस साल जब देश में चुनाव होने हैं, वे चाहती हैं कि भारत के सभी नेता बोहरा महिलाओं की अपील सुनें और महिला खतना समाप्त करने के लिए कदम उठाएं. वह कहती है कि राजनीतिक दलों को कन्याओं के सम्मान की रक्षा के प्रति और संवेदनशील और जवाबदेह होने की जरूरत है. महिला खतना उनके एजेंडे का हिस्सा होना चाहिए. बता दें कि इस्लाम की कई प्रथाओं में महिला और पुरूषों का खतना होता है. इसमें बचपन में ही उनके यौनिक अंग के अगले हिस्से को काट दिया जाता है. इसे कौमार्य से जोड़कर देखा जाता है. महिला खतना की वजह से हर साल कई बच्चियों की जान भी चली जाती है. दुनिया के कई मुस्लिम देशों में अब भी इस प्रथा का पालन किया जाता है.
from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2SxvMb4
from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2SxvMb4
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें