विनियोग खातों के ऑ़डिट ने हर स्तर पर सबसे ऊपर से लेकर सबसे नीचे तक जवाबदेही को लागू करने में अकाउंट्स ऑफिसरों विफलता को उजागर कर दिया. जिसके 2017-18 के दौरान संसदीय प्राधिकरण पर 99,610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ. मंगलवार को संसद में पेश किए गए 'केंद्र सरकार के खातों' पर सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है: 'संसद द्वारा अनुमोदित अनुदानों पर इतना अधिक व्यय संसद की इच्छा और लोकतंत्र के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है. संसद के अनुमोदन के बिना एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा सकता है, और इसलिए, इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए.' 2017-18 के दौरान अनुमोदित मांगों के विरुद्ध भारत सरकार का कुल व्यय 88,81,034 करोड़ रुपए था. जिसमें से सिविल मंत्रालयों (96 अनुदान) द्वारा 81,80,553 करोड़ (92.11 प्रतिशत), 3,81,568 करोड़ (4.30 प्रतिशत) रेलवे द्वारा (एक अनुदान), रक्षा (दो अनुदान) और 2,92,131 करोड़ (3.29 प्रतिशत)। डाक विभाग द्वारा 26,782 करोड़ (0.30 प्रतिशत). संविधान का अनुच्छेद 114 (3) यह प्रावधान करता है कि कानून द्वारा किए गए विनियोगों को छोड़कर भारत के समेकित कोष से कोई धन नहीं निकाला जाएगा. सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर), 2017, यह निर्धारित करता है कि संसद द्वारा एक साल के लिए दिए गए अनुपूरक अनुदान या अग्रिम निधि से ज्यादा खर्च नहीं किया जाएगा. सीएजी ने यह भी देखा कि 2017-18 के दौरान, 15 अनुदानों में से 18 मामलों में संपूर्ण नकदी अनुपूरक अनुपयोगी रहे. 11 ऐसे मामलों में जिनमें 11,017 करोड़ के नकद अनुपूरक भी शामिल हैं, इनमें वास्तविक खर्च तो मूल प्रावधानों से भी कम था. इसमें कहा गया है कि माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर के तहत एकत्र 94,036 करोड़ रुपए भारत के समेकित कोष में रखे गए था. ये प्रक्रिया के विपरीत क्योंकि इस उद्देश्य के लिए बनाई गई निधि में इस पैसे को जमा करना था.
from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2RXagb9
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