दुष्कर्म के आरोप का सामना कर रहे बिशप फ्रांको मुलक्कल के खिलाफ प्रदर्शन कर रही ननों ने रविवार को आरोप लगाया कि बिशप अब भी रोमन कैथोलिक चर्च के जालंधर डायोसिस के प्रशासनिक काम-काज में दखल देते हैं. मुलक्कल को पोप फ्रांसिस ने चर्च के सभी कार्यों से मुक्त कर दिया है. प्रदर्शन कर रही ननों का प्रतिनिधत्व करने वाली सिस्टर अनुपमा ने कुराविलांगड़ में बताया, ‘ हमारा विश्वास है कि बिशप एंजेलो जालंधर डायोसिस के प्रशासक हैं. लेकिन जब हम डायोसीस के पीआरओ और जीसस कॉन्ग्रिगेशन प्रमुख के साथ पत्राचार को देखते हैं तो हमें शक होता है कि बिशप फ्रांको के पास अब भी शक्तियां हैं.' ये भी पढ़ें: कार खरीदने पर ‘धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ’ जीवन जीने के आरोप में नन को नोटिस दरअसल ननों का यह बयान जालंघर डायोसिस के पीआरओ फादर पीटर कुवमपुरम की ओर से जारी बयान के एक दिन बाद आया है. कुवमपुरम कथित तौर पर बिशप मुलक्कल के करीबी हैं. दरअसल बिशप एंजेलो रूफीनो ग्रासियस की ओर से ननों को जारी एक ईमेल पर स्पष्टीकरण देते हुए कुवमपुरम ने एक बयान दिया था. ये है मामला इस मामले में नन ने 54 साल के बिशप पर 2014 से 2016 के बीच रेप और अप्राकृतिक सेक्स करने का आरोप लगाया था. जून 2018 में कोट्टयाम पुलिस को लिखित में दी गई अपनी शिकायत में नन ने आरोप लगाया था कि बिशप ने मई 2014 में कुराविलंगाड गेस्ट हाउस में उसका रेप किया था और बाद में उनके साथ लगातार यौन शोषण करते रहे. ये भी पढ़ें: राष्ट्रीय महिला आयोग ने नन के हितों की रक्षा नहीं करने का चर्च पर लगाया आरोप
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