संस्कृति को किसी भी देश की धरोहर करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि स्वामी विवेकानंद और गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर जैसी विभूतियों के योगदान के कारण ही बरसों बरस के औपनिवेशिक शासन और बाह्य आक्रमणों से देश की सांस्कृतिक धरोहर अप्रभावित रहीं. 'टैगोर सांस्कृतिक सद्भाव पुरस्कार' समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत की बहुआयामी धरोहर के प्रत्यक्ष दर्शन पहले नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर की कृतियों में दिखते हैं. उन्होंने कहा, 'भारत की सैकड़ों वर्षों की सांस्कृतिक धरोहर काफी लंबे समय की गुलामी और बाह्य ताकतों के हमले से अप्रभावित रही. ऐसा स्वामी विवेकानंद और गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर जैसी विभूतियों के योगदान के कारण संभव हो सका.' राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को राजकुमार सिंघाजीत सिंह, बांग्लादेश के सांस्कृतिक संगठन 'छायानट' और रामवनजी सुतार को लगातार 2014, 2015 और 2016 के लिए टैगोर सांस्कृतिक सद्भाव पुरस्कार प्रदान किए. समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे. सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा के शिल्पकार रामवनजी सुतार को दिया गया पुरस्कार राजकुमार सिंघाजीत सिंह को मणिपुरी नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देने और मणिपुरी नृत्य की परंपरा को बढ़ावा देने के लिए यह सम्मान दिया गया. रामवनजी सुतार को मूर्तिशिल्प को आगे बढ़ाने और गुजरात में सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा के शिल्पकार के रूप में उनके योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया. इसके अलावा बांग्लादेश के सांस्कृतिक संगठन 'छायानट' को सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए यह पुरस्कार दिया गया. इस अवसर पर राष्ट्रपति कोविंद ने सम्मान प्राप्त करने वालों को बधाई देते हुए कहा कि भारत में हर क्षेत्र की अलग पहचान है लेकिन यह अलग पहचान हमें विभाजित नहीं करती बल्कि एकता के सूत्र में बांधने और सौहार्द बढ़ाने का काम करती है. उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर अद्भुत प्रतिभा के धनी थे जिन्हें 1913 में साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला था. वे संगीतज्ञ, कलाकार एवं आध्यात्मिक शिक्षाविद होने के साथ ही एक ऐसे कवि थे जिन्होंने राष्ट्रगीत की रचना की. कोविंद ने कहा कि गुरुदेव पूरी दुनिया के थे. वे एक राष्ट्रवादी होने के साथ अंतरराष्ट्रवादी भी थे. भारत और बांग्लादेश के संबंधों में गुरुदेव की छाया स्पष्ट तौर पर दिखाई देती है. भारत का सांस्कृतिक सामर्थ्य एक रंग-बिरंगी माला जैसा इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ' गुरुदेव हर सीमा से परे थे. वो प्रकृति और मानवता के प्रति समर्पित थे. वे पूरे विश्व को अपना घर मानते थे इसलिए दुनिया ने भी उन्हें अपनापन दिया.' उन्होंने कहा कि रवींद्र संगीत में भारत के विविध रंग झलकते हैं और यह भाषा के बंधन से भी परे है. मोदी ने कहा कि संस्कृति किसी भी राष्ट्र की प्राण वायु होती है. इसी से राष्ट्र की पहचान और अस्तित्व को शक्ति मिलती है. किसी भी राष्ट्र का सम्मान और उसकी आयु भी संस्कृति की परिपक्वता और सांस्कृतिक जड़ों की मजबूती से ही तय होती है. उन्होंने कहा कि भारत का सांस्कृतिक सामर्थ्य एक रंग-बिरंगी माला जैसा है जिसको उसके अलग-अलग मनके अलग-अलग रंग और शक्ति देते हैं. सांस्कृतिक सद्भाव के लिए टैगोर पुरस्कार की शुरुआत भारत सरकार ने मानवता के प्रति गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के योगदान को रेखांकित करते हुए 2012 में उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर की थी. इसकी शुरुआत सांस्कृतिक सद्भाव के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए की गई. यह पुरस्कार वर्ष में एक बार दिया जाता है जिसके तहत एक करोड़ रुपए नकद (विदेशी मुद्रा में विनिमय योग्य), एक प्रशस्ति पत्र, धातु की मूर्ति और एक उत्कृष्ट पारंपरिक हस्तशिल्प/हस्तकरघा वस्तु दी जाती है.
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