Pulwama Attack: पुलवामा हमले की जांच में जुटी खुफिया एजेंसिया हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि इस हमले की जांच में लाल रंग की ईको (Eeco) कार और एक युवक आरजू बशीर दो अहम कड़ी हो सकते हैं. न्यूज़18 को मिली जानकारी के मुताबिक घटना के पहले CRPF काफिले की बस नंबर चार और दो में सवार जवानों ने हमलावर आदिल डार को लाल रंग की ईको कार में तीसरे नंबर की बस के पास आते हुए देखा था. वो कार को लगातार दाएं और बाएं मोड़ रहा था. तीसरे नंबर की बस के सुरक्षाकर्मी लगातार उसे दूर जाने को कह रहे थे, लेकिन करीब दो मिनट तक बस के साथ चलने के बाद आदिल ने कार को बस में भिड़ा दिया. दूसरी बसों में बैठे CRPF जवानों ने बताया कि लाल रंग की ईको कार जम्मू से ही उनके काफिले का पीछा कर रही थी. वो काफिले की सबसे आखिरी बस को अपना निशाना बनाना चाहती थी लेकिन जब वो इसमें नाकाम रही तो उसने तीसरी नंबर की बस को टक्कर मार दी. [caption id="attachment_63655" align="alignnone" width="1002"] आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मौलाना मसूद अजहर[/caption] आरजू बशीर क्यों हो सकता है अहम कड़ी? एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक टीम और एनआईए को घटनास्थल से ईको कार का एक बंपर मिला जो कि चश्मदीदों की बताई हुई बात से मेल खाती है. वहीं इस जांच में आरजू बशीर को भी अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल जांच अधिकारी इस बात का भी पता लगाने में लगे हैं कि डार को विस्फोटक कहां से मिला? माना जा रहा है कि इस बात की जांच में आरजू बशीर उनकी मदद कर सकता है. ये बशीर वही है जिससे कभी जैश-ए-मोहम्मद ने उसी काम के लिए संपर्क किया था, जिसे अब आदिल डार ने अंजाम दिया. 2017 में भी मिली थी हमले की Hint दरअसल इस मामले में बशीर ने 2017 में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसने बताया था कि जैश-ए-मोहम्मद ने उससे सेना के काफिले पर हमला करने के लिए संपर्क किया था. एक अधिकारी ने बताया कि जैश के जिस आदमी ने आरजू से संपर्क किया था और जिसने डार को विस्फोटक उपलब्ध कराया उसमें अगर कोई संबंध निकलता है तो इससे पुलवामा हमले के कई राज़ खुल सकते हैं.
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