कानून मंत्रालय एक महत्वपूर्ण विधेयक के संसद से पारित होने की उम्मीद कर रहा है, जिसमें प्रवासी भारतीयों को प्रॉक्सी वोटिंग का अधिकार दिए जाने का प्रावधान किया गया है. इस विधेयक में सैन्यकर्मी मतदाताओं के लिए भी संशोधन का प्रस्ताव किया गया है. आगामी लोकसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है ऐसे में इस विधेयक का महत्व और भी बढ़ गया है. यह विधेयक लोकसभा में पिछले साल अगस्त में पारित हो गया था और उसे राज्यसभा से मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा है. यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार आगामी संक्षिप्त बजट सत्र में इस विधेयक को पारित कराने पर जोर देगी, कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सभी लंबित विधेयक अहम हैं क्योंकि यह आखिरी सत्र है. शीतकालीन सत्र में यह हर दिन राज्यसभा की कार्यसूची में सूचीबद्ध था.’ विधेयक कानून बना तो NRI को मिल जाएगा प्रॉक्सी वोटिंग का अधिकार संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा. इसमें कुल सत्र में 11 बैठकें होंगी. मौजूदा सरकार का यह आखिरी सत्र होगा. पिछले सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही राफेल और अन्य मुद्दों को लेकर लगातार बाधित रही थी. अगर यह विधेयक कानून बन जाता है तो प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को प्रॉक्सी नियुक्त करने की अनुमति मिल जाएगी. प्रॉक्सी वोटिंग के तहत किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से मतदान किया जाता है. विदेशों में रह रहे हैं लगभग 3.10 करोड़ प्रवासी भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुमान के अनुसार विदेशों में करीब 3.10 करोड़ प्रवासी भारतीय रह रहे हैं. चुनाव आयोग की एक विशेषज्ञ समिति ने प्रवासी भारतीयों के लिए ई-वोटिंग को स्वीकार नहीं किया था. लेकिन उसने प्रॉक्सी वोटिंग के लिए अनुमति दे दी थी. विधेयक का एक अन्य प्रावधान सैन्यकर्मियों के जीवन साथी से संबंधित है. चुनाव कानून के अनुसार अभी पुरुष सैन्यकर्मी की पत्नी सैन्यकर्मी मतदाता के रूप में पंजीकृत किए जाने की हकदार है. लेकिन महिला सैन्य अधिकारी के पति को यह हक नहीं है. इस विधेयक में पत्नी शब्द को जीवनसाथी शब्द से बदले जाने का प्रस्ताव किया गया है.
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