सेंट्रल इंडस्ट्रीयल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) अपनी 50वीं गोल्डन जुबली मना रही है, लेकिन इसे इस साल गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाले दल में शामिल नहीं किया गया है. सीआईएफ को इसमें शामिल करने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. इसमें गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने एक दूसरे पर आरोप लगाया है. गृह मंत्रालय ने साफ कहा कि सीआईएसएफ को इस परेड में शामिल करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने इजाजत नहीं दी. सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि रक्षा मंत्रालय इजाजत देने में मुख्य भूमिका निभाती है. हमने गुजारिश की थी कि इस बार परेड में चार पेरामिलिट्री को शामिल किया जाए, लेकिन वह इससे सहमत नहीं हुए. गृह मंत्रालय ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्रालय ने इसका जवाब देने में महीने लगा दिए, स्पेशल ईयर होने के कारण इस बार सीआईएसएफ को इजाजत देनी चाहिए थी. सीआईएसएफ के प्रवक्ता हेमेन्दर सिंह ने एनडीटीवी से कहा कि इस बार हमारा मौका था लेकिन रक्षा मंत्रालय ने हमें इजाजत नहीं दी. रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए सीआईएसएफ को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ को पता था कि ये उसकी गोल्डन जुबली है, उन्हें समय पर जानकारी देनी चाहिए थी. इस बार कुल 17 टुकड़ी परेड में हिस्सा ले रही हैं, जिसमें आर्मी, नेवी, एयर फोर्स, पेरामिलिटरी और रिटायर्ड अधिकारी शामिल हैं.
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