तमिलनाडु के तुतिकोरिन स्थित स्टरलाइट प्लांट को फिर से चालू करने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 29 जनवरी को सुनवाई करेगा. वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर कर प्लांट को फिर से शुरू करने का अंतरिम आदेश देने की मांग की है. राज्य सरकार और मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम के नेता वायको ने वेदांता की याचिका का विरोध किया. उन्होंने कहा कि प्रदूषण संबंधी प्रावधानों पर अमल किए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता है. वायको ने कोर्ट को इस बात से भी अवगत कराया कि पिछले साल मई में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से कुछ लोगों की जान चली गई थी. न्यायमूर्ति आर.एफ.नरीमन और न्यायमूर्ति नवीन सिंहा की पीठ ने इस बात पर वायको को टोकते हुए कहा कि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने के बजाय न्यायिक पहलुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआत में संकेत दिया कि वह प्लांट शुरू करने के लिए राज्य सरकार को आदेश दे सकता है और बिजली मुहैया कराने के लिए कह सकता है. हालांकि, बाद में उसने मामले को 29 जनवरी के लिए टाल दिया. मार्च 2013 में प्लांट में गैस लीकेज से 1 शख्स की मौत हुई थी स्टरलाइट प्लांट मार्च 2013 में तब सुर्खियों में आ गया था जब उसमें गैस लीक होने से एक शख्स की मौत हो गई थी और कई अन्य बीमार हुए थे. इस घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता ने प्लांट को बंद करने के आदेश दिए थे. वेदांता कंपनी ने एनजीटी में अपील की थी जिसने सरकार का आदेश पलट दिया था. इसके बाद राज्य सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. कोर्ट ने पर्यावरण को दूषित करने के लिए कंपनी को 100 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया था. स्टरलाइट ने तूतीकोरिन प्लांट का विस्तार करने की योजना की जैसे ही घोषणा की. उसके बाद आसपास के गांववालों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए और 100 दिन तक विरोध-प्रदर्शन किया. इन प्रदर्शनों ने 22 मई, 2018 को हिंसक रूप ले लिया. प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में 13 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए थे. भारी विरोध-प्रदर्शनों और पुलिस की गोलीबारी के बाद प्लांट को 27 मार्च, 2018 को फिर बंद कर दिया गया था.
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