नए सरकारी प्रस्ताव के अनुसार अगर एक बैच में एक भी दवा घटिया पाई जाती है, तो निर्माता को, पूरे बैच के MRP के बराबर जुर्माना देना पड़ सकता है. स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि आमतौर पर एक बैच में 1000 से एक लाख यूनिट होती हैं, लेकिन ड्रग्स की संख्या- जो टैबलेट या तरल के रूप में हो सकती है - बैच के आकार के आधार पर भिन्न होती है. न्यूज 18 की खबर के अनुसार नए प्रावधान के अनुसार, निर्माता किसी भी इकाई के घटिया या क्षतिग्रस्त पाए जाने पर दंड के रूप में पूरे शिपमेंट के एमआरपी के बराबर राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा. आधिकारिक ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अलावा सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) द्वारा प्रस्तावित नया प्रावधान पैकेजिंग के दोषपूर्ण होने पर भी लागू होगा. प्रस्ताव को भारत के सर्वोच्च ड्रग सलाहकार निकाय ड्रग्स तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) द्वारा अनुमोदित किया गया है और केंद्रीय उद्योग मंत्री द्वारा अनुमोदन के लिए लंबित है. यहां तक कि अगर ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल्स एक्ट के तहत पहचाने गए 45 परीक्षणों में से किसी एक में भी एक टैबलेट फेल हो जाता है और इस प्रकार उसे घटिया घोषित कर दिया जाता है, तो कानूनी कार्रवाई शुरू करने और उसे अदालत में ले जाने के बजाय, प्रस्ताव अभियुक्त को आर्थिक दंड देने का है. अधिकारी ने कहा कि निर्माता विशेष बैच के एमआरपी के बराबर राशि का भुगतान करते हैं. यह प्रावधान तब लागू होगा अगर दवा घटिया या टूटी हुई पाई जाती है या तरल रूप में दवा युक्त बोतल क्षतिग्रस्त या लीक हो रही हो. मंजूरी मिलते ही यह प्रावधान ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का हिस्सा होगा. मौजूदा प्रणाली के तहत, यदि कोई दवा घटिया पाई जाती है, तो ड्रग इंस्पेक्टर निर्माता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता है.
from Latest News देश Firstpost Hindi http://bit.ly/2ThGsYn
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