भारतीय नौसेना ने मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में कोयले के एक खदान के भीतर चार दिन पहले दिखाई दिए एक खनिक के क्षतविक्षत शव को बाहर निकालने के सभी प्रयास रविवार को बंद कर दिए. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. नौसेना के गोताखोरों को बुधवार को खदान के मुख्य शाफ्ट से कम से कम 160 फुट नीचे एक खनिक का क्षतविक्षत शव दिखाई दिया था. इसके लिए उन्होंने मानवरहित, रिमोटली ऑपरेटेड वेहिकिल (आरओवी) का इस्तेमाल किया था. अभियान के प्रवक्ता आर सूसनगी ने बताया, ‘नौसेना ने शव को बाहर निकालने का काम आज बंद कर दिया क्योंकि आरओवी से शव निकालने की जितनी बार कोशिश की गई शव उतनी बार और क्षत विक्षत हुआ. शव निकालने का काम कम शाम से चल रहा था.’ खदान में लंबे समय से फंसे 15 खनिकों में से चार के परिवार ने शनिवार को बचावकर्ताओं से क्षत विक्षत शव को बाहर निकालने की अपील की थी ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके. इस अभियान में अनेक एजेंसियां सहयोग कर रही हैं. इसमें खदान में फंसे खनिकों को बाहर निकालने के लिए मुख्य शाफ्ट से पानी निकालने का काम किया जा रहा है लेकिन जलस्तर कम नहीं होने से पूरी कवायद का कोई फायदा नहीं निकला. उन्होंने बताया कि नौसेना के गोताखोर सरकार से आगे के निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं. एक अधिकारी ने बताया कि मेघालय सरकार खोज एवं बचाव कार्य में पेश आ रही मुश्किलों के बारे में सुप्रीम कोर्ट को अवगत करा सकती है. 13 दिसंबर को 370 फीट गहरे कोयला खदान में नदी का पानी भर जाने से सुरंग का रास्ता बंद हो गया था. तब से इसमें फंसे 15 खनिकों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी. जनवरी में ही पूर्वी जयंतिया जिले में एक और अवैध कोयला खदान में दो खनिकों के शव मिले थे. इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने असुरक्षित खनन पर 2014 से प्रतिबंध लगा रखा है. इसके बावजूद अवैध खनन जारी है.
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