केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने दिवाला और आईबीसी की वैलिडिटी को बनाए रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की शुक्रवार को तारीफ करते हुए कहा कि बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वाले लंबे समय तक नहीं बच सकते. उन्होंने कहा, 'कर्ज नहीं चुकाने वाले डिफॉल्टर प्रमोटर्स को बोली लगाने से रोकने का प्रावधान नैतिक भी है और सही भी है. ऐसा नहीं होगा तो डिफॉल्टर प्रमोटर्स का कंपनी पर नियंत्रण बना रहेगा और सिर्फ बैंक को नुकसान उठाना पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दिन में आईबीसी संहिता की संवैधानिक वैलिडिटी बरकरार रखते हुए कहा कि डिफॉल्टरों का आनंदलोक अब खत्म हो चुका है और इकोनॉमी अपनी स्थिति में लौट आई है. आईबीसी कानून की धारा 29ए को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी आवेदक का उसकी समाधान योजना को मंजूर किए जाने या उस पर विचार किए जाने का कोई अधिकार नहीं है. ये भी पढ़ें: मुझे सवालों से डर नहीं लगता, जितना हो सके असहज कर देने वाले सवाल पूछ लीजिए: राहुल गांधी ये भी पढ़ें: 10% सवर्ण आरक्षण पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार, केंद्र सरकार को दिया नोटिस
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