प्रधानमंत्री दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ परीक्षा पे चर्चा कर रहे हैं. इस कार्यक्रम में 24 राज्यों से बच्चे आए हैं. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों से कहा कि मेरे लिए ये कार्यक्रम किसी को उपदेश देने के लिए नहीं है. मैं यहां आपके बीच खुद को अपने जैसा, आपके जैसा और आपके स्थिति जैसा जीना चाहता हूँ, जैसा आप जीते है. मेरे लिए ये कार्यक्रम किसी को उपदेश देने के लिए नहीं है। मैं यहाँ आपके बीच खुद को अपने जैसा, आपके जैसा और आपके स्थिति जैसा जीना चाहता हूँ, जैसा आप जीते है : पीएम @narendramodi #ParikshaPeCharcha2 — BJP (@BJP4India) January 29, 2019 उन्होंने कहा कि अगर हम अपने आपको कसौटी के तराजू पर झौकेंगे नहीं तो जिंदगी में ठहराव आ जाएगा. जिंदगी का मतलब ही होता है गति, जिन्दगी का मतलब ही होता है सपने. जिंदगी का मतलब जी-जान से लगे रहना होता है. मां-बाप जो कहें उसे गौर से सुनना चाहिए, क्योंकि जब बच्चे गिरते हैं तो मां-बाप ही उन्हें संभालते हैं. लेकिन अभिभावकों को भी समझना होगा कि उनके प्रैशर के कारण ही बात बिगड़ती है. बच्चों को डांटते रहना ठीक नहीं है. उनकी गलतियों को प्यार से सुधारे. बच्चों से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, एक कविता में लिखा है कि, 'कुछ खिलौनों के टूटने से बचपन नहीं मरा करता है.' इसमें सबके लिए बहुत बड़ा संदेश छुपा है. उन्होंने कहा, निराशा में डूबा समाज, परिवार या व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता है, आशा और अपेक्षा उर्ध्व गति के लिए अनिवार्य होती है. एक कविता में लिखा है कि, “कुछ खिलौनों के टूटने से बचपन नहीं मरा करता है।'' इसमें सबके लिए बहुत बड़ा संदेश छुपा है : पीएम श्री @narendramodi #ParikshaPeCharcha2 — BJP (@BJP4India) January 29, 2019
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