सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम (SC/ST (Prevention of Atrocities) Act) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए एक बेंच बनाने पर विचार करेगा. शुक्रवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि वह विचार करेगी और जो भी जरूरी होगा, किया जाएगा. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह इस एक्ट के संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं और केंद्र की पुनर्विचार याचिका को उचित पीठ के समक्ष एक साथ सूचीबद्ध करने पर भी विचार करेगा. SC to look into setting up of a bench to hear pleas challenging SC/ST (Prevention of Atrocities)Amendment Act,that rules out provision for anticipatory bail for person accused of atrocities against SC/STs&review plea against Ma 20 judgement on automatic arrests&anticipatory bail pic.twitter.com/QKfzwmiD8M — ANI (@ANI) January 25, 2019 अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को यह कहते हुए एक आदेश पारित किया कि एससी/एसटी एक्ट 2018 के खिलाफ दायर याचिकाओं और केंद्र की समीक्षा याचिका पर एक साथ सुनवाई करना उचित होगा. शीर्ष अदालत ने SC/ST (Prevention of Atrocities)Amendment Act, 2018 पर रोक लगाने से गुरुवार को इनकार कर दिया था. इस संशोधित कानून के जरिए आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दिए जाने के प्रावधान को बरकरार रखा गया है. संसद ने पिछले साल 9 अगस्त को शीर्ष अदालत के फैसले को पलटने के लिए विधेयक पारित किया था. यह फैसला एससी/एसटी एक्ट के तहत गिरफ्तारी के खिलाफ निश्चित संरक्षण से जुड़ा हुआ था. अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें आरोप लगाया गया था कि संसद के दोनों सदनों ने कानून में 'मनमाने' तरीके से बदलाव करने का निर्णय किया और पूर्व प्रावधानों को इस तरह से बरकरार रखा कि निर्दोष व्यक्ति अग्रिम जमानत के अधिकार से वंचित रहे.
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